रात को लाइट बंद हो जाती है, कमरा अंधेरे में डूब जाता है, फिर भी आँखें छत की ओर उठी रहती हैं — जैसे अंधेरे में भी वो छत दिख रही हो। और तभी ये ख्याल आता है... — घर की असली मजबूती दीवारों या छत में नहीं, उन अनदेखी ताकतों में छिपी होती है जो चुपचाप सब कुछ थामे रहती हैं। वो ताकत जो कभी शोर नहीं मचाती, बस मौजूदगी से सबको सहारा देती रहती है — जैसे हवा में बसी वो हल्की-सी खुशबू जो बताए बिना ही सबको छू जाती है।
हर परिवार में कम से कम एक ऐसा व्यक्ति होता है जो "सबसे बड़ा" बनकर सबसे ज्यादा जिम्मेदारियाँ उठाता है। कभी माँ, कभी पिता, कभी बड़ा भाई या बहन। वो लोग जो दिन की शुरुआत सबसे पहले करते हैं और रात को आखिरी सोते हैं, लेकिन अपनी थकान कभी किसी से बाँटते नहीं। उनके लिए जिम्मेदारी बोझ नहीं, बल्कि प्यार से निभाई जाने वाली एक शांत साधना है।
इसी मौन समर्पण को आवाज़ देने की छोटी-सी कोशिश है यह कविता। प्रकृति के उन बिंबों के ज़रिए जो हमें सदियों से जीवन सिखाते आए हैं — दीपक की तरह जलना, चट्टान की तरह अडिग रहना, नदी की तरह बहते जाना, और पेड़ की तरह जड़ों से सबको थामे रहना।
~ कविता ~
मैं हूँ सबसे बड़ा, जिम्मेदारियों का सार,
घर के इस ताने-बाने का अडिग आधार।
सबसे बड़ा हूँ, सर पर भार उठाए,
हर फर्ज़ को दिल से सदा निभाए।
छोटों के सपनों को दूँ आकार,
बड़ों की आशा का बनूँ आधार।
रात के अंधेरे में दीप सा जलूँ,
हर चुनौती में मैं चट्टान सा ढलूँ।
हर खुशी में स्नेह का उजाला भरूँ,
परिवार का हर कदम संभालूँ, बढ़ूँ।
आँसुओं को मिटाऊँ, हँसी सजाऊँ,
हर दिल में भरोसे का दीप जलाऊँ।
जिम्मेदारियों का सार मैं,
घर का ताना-बाना हूँ आधार मैं।
सबसे बड़ा हूँ, सर पर भार उठाए,
हर फर्ज़ को दिल से सदा निभाए।
नदी के बहाव सा जीवन बहता जाए,
हर मोड़ पर एक नया सबक सिखाए।
जीवन सुख-दुख की धाराओं में ढलता रहे,
जीवन का हर सुर सदा सजाता रहे।
घर का संबल, मैं तने हुए पेड़ सा,
हर आंधी में अडिग, खड़ा वृक्ष सा।
जड़ों में बसा है स्नेह का किस्सा,
हर शाख में फैला जीवन का हिस्सा।
धूप हो या छांव, सदा देता सहारा,
हर बंधन को बांधे, रिश्तों का प्यारा।
प्रेम से सिंचित, ये परिवार "हमारा",
हर खुशी का स्रोत, हूँ मैं इसकी "धारा"।
ये पंक्तियाँ लिखते हुए आँखें भर आईं थीं, क्योंकि ये मेरे आसपास के उन चेहरों की सच्ची कहानी हैं जो बिना किसी क्रेडिट के रोज़ घर को संभालते हैं।
क्या हम सबने कभी उनसे कहा भी है "थैंक यू"? या बस ये मान लिया कि वो तो ऐसे ही हैं?
कभी-कभी एक छोटा-सा "शुक्रिया" भी उस दीये को रोशनी दे देता है जो सालों से सबके लिए जल रहा है, लेकिन खुद कभी अपनी चमक नहीं देख पाता।
🪔🌿❤️




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