सच और गहराई — जब शब्द मौन हो जाते हैं


सच और गहराई 

जब शब्द मौन हो जाते हैं

एक साधक समुद्र की सतह पर ध्यानमग्न बैठा है — ऊपर सूर्यास्त का आकाश और एक खुला द्वार, नीचे जल के भीतर प्रकाश में नहाया एक प्राचीन मंदिर। सच और गहराई कविता का चित्रण।





कभी-कभी रात के किसी पहर में, जब सब सो जाते हैं और मन की परतें एक-एक कर उठने लगती हैं — तब कुछ शब्द आते हैं। बिना बुलाए। बिना तैयारी के।

यह कविता ऐसे ही आई।

सच को हम बाहर ढूँढते हैं — किताबों में, रिश्तों में, किसी के शब्दों में। पर शायद सच वहाँ कभी था ही नहीं। शायद वह हमेशा भीतर था — बस हम इतने शोर में थे कि सुन नहीं पाए।

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कविता


सच और गहराई

सच वो आईना नहीं जो दीवार पर टँगा हो, 

जिसे हम रोज़ देखें और रोज़ भूल जाएँ। 

सच वो ख़ामोशी है जो सीने में जागती है, 

जब रात गहरी हो और नींद न आए।

गहराई कोई कुआँ नहीं जिसे रस्सी से नापो, 

न कोई समंदर जिसे जहाज़ से पार करो। 

गहराई वो लम्हा है जब इंसान ख़ुद से मिलता है — 

बिना किसी गवाह के, बिना किसी शोर के।

हम उम्र भर शब्दों में सच को ढूँढते रहे, 

हर किताब पलटी, हर दरवाज़ा खटखटाया। 

और सच था वहाँ — उसी पल से, उसी जगह — 

जहाँ शब्द ख़त्म होते हैं, और साँस ठहर जाती है।

भीड़ में चले तो अपनी आवाज़ खो दी, 

दूसरों की आँखों से ख़ुद को देखते रहे। 

तन्हाई में बैठे तो एक अजीब सी बात हुई — 

जो हम थे, वो सामने आ गया, बिना बुलाए।

शोर तो सतह पर है, हमेशा से था, हमेशा रहेगा, 

लहरें उठती हैं, टकराती हैं, बिखर जाती हैं। 

जो डूबा वही जान पाया — पानी के नीचे एक अलग ही दुनिया है,

 जहाँ न हलचल है, न हिसाब है, न थकान।

किताबों में नहीं, मंदिर-मस्जिद की सीढ़ियों पर नहीं, 

न किसी पीर के क़दमों में, न किसी मंत्र की गूँज में। 

सच मिलता है उस एक पल में — 

जब तुम बोलना बंद कर दो, 

जब तुम ढूँढना बंद कर दो, 

बस ठहर जाओ — सच को रास्ता पता है।

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यह कविता किसी के लिए नहीं लिखी — और शायद इसीलिए यह सबके लिए है।

अगर इन शब्दों ने आपके भीतर कुछ छुआ हो — तो वह आपका अपना सच था, जो एक पल के लिए जाग उठा।

उसे जाने मत दीजिए। 

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To read this poem in English: Truth & Depth

© अनु चंद्रशेखर | ORCID: 0009-0002-8916-9170 यह रचना Creative Commons CC BY-NC-ND 4.0 के अंतर्गत संरक्षित है। अनुमति के बिना पुनर्प्रकाशन वर्जित है।

Disclaimer: इस ब्लॉग पर प्रकाशित सभी रचनाएँ — कविताएँ, विचार, और लेख — मेरे व्यक्तिगत अनुभव और भावनाओं की अभिव्यक्ति हैं। यह किसी पेशेवर परामर्श का विकल्प नहीं है।


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